Friday, October 19, 2018

अप्रतिम साहस और अकथनीय दुख की जुगलबन्दी


कहते हैं कि किस्मत के लिखे को कोई बदल नहीं सकता, लेकिन इसी के साथ-साथ यह भी कहा जाता है कि दुनिया में नामुमकिन कुछ भी नहीं होता. ज़रूरत होती है आपके पक्के इरादे की. ये दोनों बातें एक साथ नमूदार हुईं उस प्रसंग में जो मैं आपको सुनाने जा रहा हूं. हाल में अमरीका के इण्डियाना में एक अनूठी शादी हुई. शादी हुई, शादी का सारा तामझाम मौज़ूद था, दुल्हन थी, दुल्हन के लिबास में थी, दुल्हा दुल्हन के तमाम परिवारजन और मित्रगण थे, लेकिन दूल्हा नहीं था. शादी फिर भी हुई. शादी हुई मृत दूल्हे की कब्र के साथ! यानि किस्मत के लिखे को बदल ही दिया गया! और ऐसा किया दुल्हन जेसिका पेजैट ने.

बेहतर होगा कि सारी बात सिलसिलेवार बता दी जाए. बरसों पहले जेसिका पेजैट की सगाई केण्डल जेम्स मर्फी के साथ हुई थी. एक दूसरे से महज़ सात मील की दूरी पर रहने वाले इस युवा जोड़े की पहली मुलाक़ात कॉलेज में हुई और फिर आहिस्ता-आहिस्ता वे एक दूसरे के प्रेम में डूबते गए. जेसिका ने बाद में बताया कि “केण्डल बेहतरीन इंसान थे. बहुत प्यार करने वाले और दयालु. वे किसी को भी अपने कपड़े उतारकर पहना देते थे.” उनकी सगाई के किस्से बहुत दिनों तक लोगों की ज़ुबां पर थिरकते  रहे. जैसे जैसे उनकी शादी का दिन नज़दीक आता जा रहा था, उनकी बेताबी भी बढ़ती जा रही थी. शादी की तैयारियां ज़ोर-शोर से चल रही थीं. लेकिन नियति को शायद उनकी खुशी स्वीकार्य नहीं थी. शादी से मात्र नौ महीने पहले एक भयंकर दुर्घटना हो गई. केण्डल जेम्स मर्फी जो कि एक स्वयंसेवी अग्निशामक यानि फायरफाइटर था, किसी घायल की जान बचाने जाते हुए एक अन्य ड्राइवर की गाड़ी तले कुचला गया. संयोग की बात यह थी कि वह ड्राइवर भी उसी घायल की जान बचाने जा रहा था. बताया गया कि वह ड्राइवर न केवल नशे में था, बहुत तेज़ गाड़ी चला रहा था और साथ ही मोबाइल पर बात  भी कर रहा था. केण्डल जेम्स मर्फी ने दुर्घटनास्थल पर भी दम तोड़ दिया. केण्डल की मौत के कुछ ही समय बाद जेसिका के पास बुटीक से फोन आया कि उसका शादी का जोड़ा तैयार है. भला इससे बड़ी विडम्बना भी कोई और हो सकती है?

ज़िन्दगी में आए इस भयंकर तूफान के खिलाफ़ खड़े होने की ताकत जेसिका पेजैट ने अपने भीतर कैसे संजोई होगी, सोचकर आश्चर्य होता है. सबसे बड़ा फैसला  उन्होंने यह किया कि केण्डल की मौत के बावज़ूद वो शादी रद्द नहीं करेंगी, न केवल  रद्द नहीं करेंगी, पूर्व निर्धारित तिथि  को ही करेंगी. बाद में जेसिका ने बताया, “मैं केण्डल के जाने के बावज़ूद इस दिन को उसी शिद्दत से मनाना चाहती थी, बावज़ूद इस बात के कि वो अब शारीरिक रूप से मेरे साथ  नहीं थे. मैं इस दिन की यादों को संजोकर रखना चाहती थी.” और इसलिए पूर्व निर्धारित 29 सितम्बर को जेसिका ने वही सफेद रंग का दुल्हन का लिबास धारण किया जो उन्होंने इस ख़ास दिन के लिए तैयार करवाया था. उनकी शादी की तस्वीरें खींचने के लिए वही फोटोग्राफर वहां उपस्थित थीं  जिन्हें  जेसिका और केण्डल ने मूल रूप से इस दिन फोटो खींचने का दायित्व सौंपा था. हां, इतना ज़रूर है कि वे केवल शादी करना चाहती थीं, फोटो शूट उनकी योजना में शामिल नहीं था. वह अनायास ही हो गया. जेसिका पेजैट ने अपने प्रिय केण्डल जेम्स मर्फी  की यादगार चीज़ों -उनकी आग बुझाने वाली पोशाक, हेलमेट, विशेष जूतों और उन सूरजमुखी के फूलों के साथ तस्वीरें खिंचवाई जो वे अपनी शादी के समय काम में लेने वाले थे. कुशल फोटोग्राफर ने बाद में कुछ तस्वीरों में फोटोशॉप करके केण्डल जेम्स को भी शामिल कर दिया. बाद में जब ये फोटो फ़ेसबुकर आए और फिर दुनिया भर में वायरल हुए तो लोगों ने इनमें उस युवती के अप्रतिम साहस और अकथनीय दुख दोनों को एक साथ देखा. खुद जेसिका ने बाद में कहा, “मैं अन्दर से टूटा हुआ महसूस कर रही थी. मेरी बगल में मेरा दूल्हा नहीं था. मैं वहां अकेली खड़ी थी.” लेकिन वैसे वे अकेली कहां थीं? उनका प्रिय केण्डल पास ही तो सो रहा था. और उसी चिर निद्रा में डूबे केण्डल  के साथ उन्होंने विवाह किया. इस अनूठी शादी में केण्डल के वे तमाम सहकर्मी भी शामिल हुए जो उनके जीवन के आखिरी दिन उनके साथ थे.

बाद में अपनी इस अनूठी शादी की तस्वीरों को देखकर जेसिका ने कहा, “तस्वीरें देखकर मुझे लगता है कि केण्डल मेरे पास ही हैं. मैं उन्हें हंसते हुए देख सकती हूं. वो आज भी मेरे दिल में मौज़ूद हैं. मैं उन्हें महसूस कर सकती हूं.” बहुत सारे लोगों ने इन तस्वीरों को देखकर जेसिका से सम्पर्क  किया और उन्हें बताया कि उनकी इन तस्वीरों ने उन्हें खुद उनके अपने शोक से उबरने की ताकत  दी है.
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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत शुक्रवार, 19 अक्टोबर, 2018 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ. 

Wednesday, October 10, 2018

ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मशहूर हुआ पर्यटन स्थल


बहुत सारे देशों की बहुत सारी जगहें अलग-अलग कारण से इतनी विख्यात हैं कि दुनिया भर के पर्यटक वहां खिंचे चले आते हैं. पर्यटन से होने वाली आय से न केवल स्थानीय नागरिकों का कल्याण होता है उस देश विशेष की सरकार को भी अपनी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने में भारी सहायता  मिलती है. कुछ स्थान अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाने जाते हैं तो कुछ धर्म, अध्यात्म, पर्यावरण, नैसर्गिक सौंदर्य, खरीददारी, मौज़ मस्ती वगैरह के लिए. लेकिन अगर कोई आपसे यह कहे कि हमारी इस रंग बिरंगी दुनिया में कम से कम एक जगह ऐसी भी है जहां पर्यटक घूमने फिरने से  ज़्यादा इस बात से आकर्षित होकर आते हैं कि वहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना अपेक्षाकृत आसान है, तो क्या आप विश्वास कर लेंगे?

दक्षिण कोरिया का जेजू द्वीप पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है. ज्वालामुखी विस्फोट से बना यह द्वीप कोरिया के दक्षिणी पश्चिमी हिस्से से मात्र सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. निकटवर्ती चीन से बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक जेजू के समुद्र तट का आनंद लेने, खरीददारी करने और जुआ खेलने के लिए आते हैं, लेकिन इसी के साथ चीन से आने वाले पर्यटकों में ऐसे लोगों  की संख्या भी बहुत ज़्यादा होती है जो यहां सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस लेने आते हैं और अगर उस काम  से समय बच जाता है तो थोड़ा पर्यटन भी कर लेते हैं. दरअसल चीन के बड़े शहरों में ड्राइविंग स्कूल से लाइसेंस बनवाने पर जितना खर्चा होता है उससे कम खर्च में जेजू में आकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया जा सकता है, और पर्यटन भी हो जाता है. चीन की बहुत सारी पर्यटन कम्पनियां दक्षिण कोरिया का हवाई कहे जाने वाले इस जेजू द्वीप में आकर लाइसेंस  बनवाने के लिए पांच दिन का हॉलीडे पैकेज तक देने लगी हैं. ये पैकेज लगभग 1300 डॉलर से शुरु होते हैं और इस में घूमना-फिरना भी शामिल होता है. इसके विपरीत चीन की राजधानी बीजिंग में एक वीआईपी ड्राइविंग कोर्स का खर्चा करीब 2200 डॉलर होता है. इतना ही नहीं, वहां ड्राइविंग लाइसेंस मिलना है भी बहुत कठिन. इसके अलावा यहां से मिलने वाले लाइसेंस का एक अतिरिक्त लाभ यह भी है कि यह विदेशों में भी मान्य है, जबकि चीन में लिया गया लाइसेंस  केवल चीन में ही काम में आ सकता है. इस बात को यों समझें. संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर इण्टरनेशनल ड्राइविंग परमिट की व्यवस्था शुरु की गई  जिससे यह सुविधा हो गई कि जिनके पास ये परमिट हों वे लगभग एक सौ पचास अन्य देशों में भी कार किराये पर ले सकते और ड्राइव कर सकते हैं. चीन ने इस समझौते पर दस्तखत नहीं किए इसलिए चीनी ड्राइविंग लाइसेंस पर यह परमिट नहीं मिलता है जबकि दक्षिण कोरिया वाले पर मिल जाता है. इस वजह से वे चीनी जो दुनिया के अन्य देशों में रहते या जाते रहते हैं उन्हें अपने देश के लाइसेंस की बजाय दक्षिण कोरिया का लाइसेंस लेना अधिक लाभप्रद लगता है. दक्षिण कोरिया के इस लाइसेंस को पा लेने के बाद चीनी नागरिकों को अपने देश में एक सामान्य लोकल ड्राइविंग परमिट लेना होता है जो आसानी से मिल जाता है. वैसे  चीन में ड्राइविंग लाइसेंस पाना बहुत कठिन है. एक तो यह बात कि वहां आवेदकों की तुलना में टेस्ट सेण्टर बहुत कम हैं इसलिए प्रतीक्षा सूची बहुत लम्बी होती है, और अगर कोई परीक्षा के किसी भी चरण में नाकामयाब हो जाए तो उसके इंतज़ार की घड़ियां और अधिक लम्बी हो जाती हैं. चीन का टेस्ट इस मामले में भी मुश्क़िल है कि वहां लिखित परीक्षा में सौ सवाल पूछे जाते हैं जबकि दक्षिणी कोरिया में मात्र चालीस सवाल ही पूछे जाते हैं. यही नहीं, चीन में उत्तीर्ण होने के लिए नब्बे प्रतिशत अंक ज़रूरी होते हैं, लेकिन कोरिया में साठ प्रतिशत अंक लाने पर ही उत्तीर्ण कर दिया जाता है.

दक्षिण कोरिया में ड्राइविंग लाइसेंस लेने की प्रक्रिया न तो चीन जितनी जटिल है और न उतनी समय खपाऊ. सामान्यत: एक दिन में टेस्ट की सारी प्रक्रिया पूरी हो जाती है और आवेदन करने से लगाकर आपके हाथ में लाइसेंस आने में अधिकतम एक सप्ताह लगता है. बहुत सारे पर्यटन पैकेज सुलभ कराने वाले कोरिया की ड्राइविंग एकेडेमी से तालमेल बिठाकर तेरह घण्टों की अनिवार्य ड्राइविंग ट्रेनिंग का भी इंतज़ाम कर देते हैं और ये दावा करते हैं  कि इनकी दिलवाई  ट्रेनिंग के बाद टेस्ट में सफलता करीब-करीब सौ फीसदी सुनिश्चित होती है. चीनियों के लिए जेजू द्वीप में आकर ड्राइविंग लाइसेंस लेने में एक और सुविधा यह भी है कि यहां आने के लिए उन्हें वीज़ा भी नहीं लेना होता है.

ड्राइविंग लाइसेंस और पर्यटन के इस गठबंधन ने क्या आपको भी यह सोचने को प्रेरित किया है कि ऐसे और कौन-से गठबंधन मुमकिन हैं?

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, दिनांक 09 अक्टोबर, 2018 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ. 

Tuesday, October 2, 2018

अजीबोगरीब किस्सा आग बुझाने वाले दूल्हे का


जीवन में बहुत बार ऐसा कुछ घटित हो जाता है जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं होता है. लेकिन जब वो घटित हो चुका होता है तो उसकी स्मृतियां भावनाओं का पूरा इंद्रधनुष रच  देती हैं. अब देखिये ना, अमरीका के इस युगल के जीवन में यकायक जो घटित हो गया उसे भला कभी वे भूल सकेंगे?

मैं बात कर रहा हूं मिनेसोटा की बत्तीस वर्षीया क्रिस्टा बोलां और उनके दोस्त उनचालीस वर्षीय जेरेमी बुरासा की. कोई पांच बरस पहले क्रिस्टा बोलां की सगाई जेरेमी बुरासा के साथ हुई थी. और अब वे शादी कर लेना चाहते थे.  लेकिन जब भी वे इसकी योजना बनाने लगते  कोई न कोई अड़चन आ जाती. इस बार भी ऐसा ही हुआ. सब कुछ तै हो गया, लेकिन ऐन वक़्त पर बिल्ली रास्ता काट गई. जो समारोह स्थल उन्होंने अपने विवाह के लिए बुक किया था, वह अचानक अनुपलब्ध हो गया. लेकिन इस बार वे भी ठाने बैठे थे कि शादी तो पूर्व निर्धारित तारीख को ही करेंगे. जब और कोई जगह उन्हें नहीं मिल पाई तो अग्नि शमन दस्ते के कर्मचारी और दूल्हे मियां जेरेमी ने सोचा कि क्यों न अपने अग्नि शमन केंद्र को ही विवाह स्थल बना लिया जाए. इस शुभ काम के लिए अफसरों की अनुमति भी मिल गई! अब वैसे तो अग्नि शमन जैसी इमरजेंसी सेवा वालों को हमेशा ही इस बात का खतरा बना रहता है कि जाने कब बुलावा आ जाए, जेरेमी थोड़ा आश्वस्त यह सोचकर था कि एक तो उसके इलाके में बहुत ज़्यादा रिहायश नहीं है, दूसरे वहां आग लगने की घटनाएं ज़्यादा नहीं होती हैं और तीसरे उस दिन उसकी ड्यूटी भी नहीं है.

तो शादी के रस्मो-रिवाज़ शुरु हुए, हंसी-खुशी के माहौल में सब कुछ भली भांति सम्पन्न होता जा रहा था. नव विवाहित जोड़ा  फोटो खिंचवाने की तैयारी में था  कि अचानक उस अग्नि शमन केंद्र के सायरन चीख उठे. पास के एक घर में आग लग गई थी. बुरासा ने अपनी नई नवेली दुल्हन की तरफ देखा, और उसने भी तुरंत जैसे आंखों ही आंखों में जवाब दे दिया, “नहीं. तुम्हें नहीं जाना है.” शायद उसे भी लगा हो  कि भला यह भी कोई वक़्त है आग बुझाने के लिए जाने का! कुछ ही पल बीते होंगे कि घटनास्थल से एक बार फिर बुलावा आया. आग काबू में नहीं आ रही थी और वहां और अधिक लोगों की सख़्त ज़रूरत थी. बुरासा को लगा जैसे उसके साथी उसे ही पुकार रहे हैं. एक बार फिर नई नवेली पत्नी से उसकी आंखें मिलीं, और इस बार जैसे पत्नी भी मना नहीं कर सकी. इशारों ही इशारों में उसने कहा, “जाओ. तुम्हारे साथी तुम्हें पुकार रहे हैं, जाओ!”

बिना एक भी पल गंवाए बुरासा ने अपनी चमकती कमीज़ उतार कर कामकाजी ड्रेस धारण की और उछल कर अपने आग बुझाने वाले वाहन  पर जा सवार हुआ. जब वह अपना वाहन उस भवन से बाहर निकाल रहा था, विवाह में शामिल होने आए तमाम मेहमान कतारबद्ध खड़े होकर अपनी शुभ कामनाओं के साथ उसे विदा कर रहे थे. क्रिस्टा सोच रही थी, इतनी फुर्ती तो मैंने कभी नहीं देखी बुरासा में! और जब वह वहां से चला गया, क्रिस्टा बोलां, जो अब तक क्रिस्टा बुरासा बन चुकी थी अनायास ही उन त्रासदियों को याद करने लगी जो हाल में उसके जीवन में घटित हुई थीं. एक भयानक अग्नि काण्ड में उसकी बहन का घर जल कर खाक हो गया था, और जैसे इतना ही काफ़ी न हो, उस आग ने उसके ग्यारह और नौ बरस के भतीजे भतीजियों को भी लील लिया था. यह कोई कम भयानक  हादसा न था. अपने पांच बरस के प्रणय काल में वह यह भी जान चुकी थी कि जेरेमी का काम कितनी जोखिम भरा  है. जेरेमी प्राय: उससे अपने कामकाज के बारे में बातें किया करता था. न जाने कितनी आशंकाएं उसे व्याकुल किये दे रही थीं. वह मन ही मन प्रार्थना कर रही थी कि उसका जेरेमी जल्दी से जल्दी और सुरक्षित लौट आए.

और उधर जेरेमी जब घटनास्थल पर पहुंचा तो उसने पाया कि पूरा घर आग की लपटों में घिरा हुआ है, हालांकि वहां रहने वालों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका था. दो घण्टों की कड़ी मेहनत के बाद उस आग पर भी काबू पा लिया गया. और तब तुरंत ही उसके अधिकारी ने उसे कहा कि वो अपने विवाह स्थल पर लौट जाए. जैसे ही बहुत थक कर लेकिन संतुष्ट मन से वो  वापस अग्नि शमन केंद्र स्थित अपने विवाह स्थल पर पहुंचा, उसका इंतज़ार कर रहे मेहमानों ने खड़े होकर अभिवादन करते हुए उसका स्वागत किया. पहले वो समारोह का केंद्र बिंदु था, अब हीरो भी बन चुका था.

पार्टी नए जोश-ओ-खरोश के साथ फिर शुरु हो चुकी थी.

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक स्तम्भ कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, 02 अक्टोबर, 2018 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ.