Tuesday, January 23, 2018

परेशानियों में भी तलाश की जा सकती हैं खुशियां

यह कितनी रोचक बात है कि चट मंगनी पट ब्याह  की देशी कहावत चरितार्थ हुई सात समुद्र पार अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में. वहां के एक संवेदनशील युवा, डैनी रॉस ने मात्र दो घण्टे से भी कम की अवधि में अपनी प्रेयसी निकोल से मंगनी और ब्याह दोनों ही कर डाले, और वो भी बाकायदा और परिवारजन की उपस्थिति में. असल में निकोल डैनी से अक्सर यह कहा करती थी कि “काश! ऐसा हो कि हम मेहमानों को सगाई की पार्टी के लिए आमंत्रित करें और फिर उन्हें यह कहकर अचम्भे में डाल दें कि हम अभी शादी भी कर रहे हैं.”  यह जैसे निकोल का एक ख़्वाब था, और उससे बेहद प्रेम करने वाले डैनी ने ठान लिया कि वह अपनी प्रेयसी के इस ख़्वाब को पूरा करके ही रहेगा, चाहे उसे इसके लिए कितनी भी परेशानियां क्यों न उठानी पड़ें. डैनी के इस संकल्प की एक और भी वजह थी. उसे यह बात मालूम थी कि उसकी प्रिया निकोल ल्यूपस नामक एक लाइलाज़ रोग से पीड़ित है. इस रोग में शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र ग़लती से स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण कर उन्हें नष्ट करने लगता है और इस वजह से रोगी को अनेक व्याधियां अपनी जकड़न में लेने लगती हैं. इस रोग की एक ख़ास बात यह है कि तनिक भी  चिंता अथवा तनाव से यह उग्र रूप धारण करने लगता है, इसलिए चिकित्सक लोग पहली सलाह यही देते हैं कि इसके मरीज़ को हर तरह की चिंता और तनाव से मुक्त रखा जाए.

डैनी ने तै कर लिया कि वह न केवल निकोल की अचानक शादी करने की तमन्ना को पूरा करेगा, उसे शादी की तैयारियों के हर तनाव से भी पूरी तरह मुक्त रखेगा. अपने इरादे को उसने पूरी सावधानी और गोपनीयता से साथ साकार करने की योजना तैयार की. पूरे पांच महीनों के अनथक श्रम और परिवार के कुछ बेहद नज़दीकी लोगों के सहयोग से उसने निकोल के सपने और अपनी योजना को मूर्त रूप देकर प्रेम की एक मिसाल कायम की. उसने सगाई की अंगूठियों  के चयन से लगाकर शादी के जोड़ों के चुनाव तक में निकोल को शामिल किए बग़ैर भी उसकी पसंद का पूरा ध्यान रखा. निकोल के लिए उसके माप का शादी का गाऊन खरीदने के लिए उसने निकोल की मां की मदद ली, जो संयोग से देहाकार में निकोल जैसी ही हैं. शादी की सारी खरीददारी कर वो एक जगह गोपनीय रूप से जमा करता रहा. और जब सारी तैयारियां पूरी हो गईं, तो निकोल को घुमाने के लिए शहर से बाहर ले गया.

लेकिन असल में घुमाने के लिए बाहर ले जाना उसकी योजना का एक हिस्सा था. उनकी अनुपस्थिति में डैनी के मां-बाप उनके घर में आ गए. मां-बाप के लिए  डैनी ने बहुत विस्तृत निर्देश लिख कर रख छोड़े थे कि उन्हें कैसे क्या-क्या तैयारियां करनी हैं. अपनी योजना को लेकर डैनी इतना आग्रहशील था कि उसने अपने मां-बाप के लिए यह भी लिख छोड़ा था कि उन्हें हर हालत में उसके लिखित निर्देशों का अक्षरश: पालन करना है और किसी भी स्थिति में उन निर्देशों से ज़रा भी इधर उधर नहीं होना है. जब निर्धारित कार्यक्रमानुसार डैनी और निकोल घूम कर लौटे तो निकोल को मात्र यह अनुमान था कि उसके प्रिय ने उसके लिए एक सरप्राइज़ बर्थडे पार्टी आयोजित की होगी. घर के पिछवाड़े में कुछ रोशनी वगैरह देखकर उसका यह  अनुमान और पुख़्ता हो गया. लेकिन शादी तो दूर, सगाई की बात भी  उसके जेह्न में दूर-दूर तक नहीं थी. लेकिन कुछ ही मिनिटों के बाद निकटस्थ परिवार जन की उपस्थिति में उसका प्रिय डैनी उसके सामने घुटनों के बल बैठ कर प्रोपोज़ कर रहा था. चकित निकोल ने जैसे ही उसका प्रस्ताव स्वीकार किया, डैनी ने उसके ताज़्ज़ुब को और बढ़ाते हुए कहा, “तुम जानती ही हो कि मैं तुमसे कितनी मुहब्बत करता हूं! अगर तुम चाहो तो हम लोग अभी शादी भी कर लें. हमारे सारे प्रियजन यहां मौज़ूद हैं ही!” और यह कहते-कहते उसने निकोल को पीछे घुमाया तो उसकी नज़र पड़ी वहां सजे अपने वेडिंग गाउन और डैनी के टक्सेडो पर. यानि तैयारियां पूरी थीं.

कहना अनावश्यक है कि अधिकांश चकित परिजनों की उपस्थिति में निकोल और डैनी विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए. अधिकांश इसलिए कि कुछ बेहद नज़दीकी परिजन डैनी की इस योजना से परिचित थे और उन्हीं के सक्रिय सहयोग से यह विवाह इस सुव्यवस्था के साथ सम्पन्न हो पाया था. इस अनुभव से अभिभूत निकोल ने बाद में कहा कि मैं ऐसा ही विवाह चाहती थी. डैनी से विवाह का इससे बेहतर रूप कोई और हो ही नहीं सकता था. डैनी का कहना था कि उसे बहुत खुशी होगी अगर ल्यूपस से ग्रस्त कोई व्यक्ति इस विवाह के बारे में जानेगा और यह समझेगा कि परेशानियों में भी खुशियां तलाश की जा सकती हैं!


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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, 23 जनवरी, 2018 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ. 
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