Thursday, June 29, 2017

किस्सा तलाक की देवी का

हर भाषा में ऐसे अनगिनत शब्द होते हैं, जिनका किसी भी दूसरी भाषा में ठीक-ठीक अनुवाद नामुमकिन होता है. अंग्रेज़ी भाषा का ऐसा ही एक शब्द है डीवा (Diva) जिसकी उत्पत्ति जिस इतालवी संज्ञा से हुई उसका  अर्थ हमारी देवी के निकट माना जा सकता है, लेकिन अंग्रेज़ी में जिसका प्रयोग गीत-संगीत, नृत्य, ऑपेरा, सिनेमा और पॉप संगीत की शीर्षस्थ महिला शख़्सियतों के लिए होने लगा. बाद में इस शब्द के साथ कुछ शरारती अर्थ-ध्वनियां भी जुड़ गईं और यह शब्द ठीक देवी जैसा पाक-साफ़ नहीं रह गया. इस शब्द की याद मुझे आई  इंग्लैण्ड की उनचास वर्षीया सुश्री वर्डाग के संदर्भ  में, जिन्हें डीवा ऑफ डिवॉर्स यानि तलाक की देवी कहा जाता है. इन सुश्री वर्डाग की काबिलियत का आलम यह है कि इनकी कानूनी फर्म की लंदन में अवस्थिति की वजह से लंदन को ही डिवॉर्स कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड के रूप में जाना जाने लगा है. सुश्री वर्डाग की ख्याति अत्यधिक वैभवशाली व्यक्तियों को उनकी असफल वैवाहिक ज़िंदगी से मुक्ति और अधिकतम सम्भव हर्ज़ाना राशि दिलवाने के लिए है. कहा जाता है कि इनकी इस ख्याति के कारण पूरी दुनिया में जैसे ही किसी वैभव सम्पन्न युगल की शादी पर संकट के बादल मण्डराने लगते हैं, दोनों के बीच सुश्री वर्डाग के पास पहले पहुंचने की एक उन्मादपूर्ण स्पर्धा भी शुरु हो जाती है. दोनों की दिली तमन्ना होती है कि अदालत में सुश्री वर्डाग उसका प्रतिनिधित्व करे न कि उसके साथी का. और जब उनकी ख्याति इतनी है तो इस बात पर कोई आश्चर्य क्यों हो कि  उनकी फीस लगभग आठ सौ पाउण्ड (कर अतिरिक्त) प्रति घण्टा है और मात्र बारह बरस  पहले शुरु हुई उनकी फर्म वर्डाग्ज़ की सालाना आय एक करोड़ पाउण्ड आंकी जाती है.

इन सुश्री वर्डाग का जन्म ऑक्सफोर्ड में  एक अंग्रेज़ मां और पाकिस्तानी पिता के घर हुआ, लेकिन जब वे बहुत छोटी थीं तभी उनके पिता उन लोगों को छोड़ कर पाकिस्तान जा बसे और उनका लालन-पालन अकेले उनकी मां ने किया. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्डाग ने लंदन में वित्तीय और वाणिज्यिक कानून के क्षेत्र में काम करना शुरु किया और उसमें काफी सफल भी रहीं.  वर्ष 2000 में उनके कैरियर  में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें खुद अपने तलाक का मुकदमा लड़ना पड़ा, और इसमें रोचक बात यह रही कि यह मुकदमा लड़ने वाले उनके वकील ने भी बाकायदा सपारिश्रमिक  उनकी सेवाएं लीं. और तभी उन्हें महसूस हुआ कि भले ही वित्तीय कानून बौद्धिक रूप से बेहद दिलचस्प हों, पारिवारिक कानून का क्षेत्र भी उनसे कम रोचक नहीं होता है. बल्कि यहां तो आप व्यक्तियों के निजी जीवन में आ रही मुश्क़िलों के लिए, उनकी ज़मीन-जायदादों और व्यापारों को बचाने के लिए तथा इस बात के लिए कि उनके सम्पर्क उनके बच्चों  के साथ बने रहें - इन  आधारभूत बातों के लिए  लड़ते हैं. और इस एहसास के बाद सन 2005 में उन्होंने वित्तीय और वाणिज्यिक कानून का काम छोड़ अपने घर के ही एक कमरे से पारिवारिक कानून की प्रैक्टिस शुरु कर दी. शुरुआत में उनके पास एक भी मुवक्किल नहीं था और तीन बच्चों के भरण पोषण की ज़िम्मेदारी उन पर थी. वर्डाग ने अपनी पहचान बनाने के लिए बहुत द्रुत गति से नेटवर्किंग की. जहां भी मौका मिलता वे पहुंच जातीं  और अपना परिचय देतीं. और तभी उन्हें अपनी पहली मुवक्किल मिली, जिसके बच्चे भी उनके बच्चों वाले स्कूल में थे. उसे वे अच्छी भरणपोषण राशि दिलवा पाईं तो उनका नाम हुआ, और उनके पास और केस आने लगे. आज स्थिति यह है कि उनके पांच ऑफिसों में कुल पचपन वकील काम करते हैं. भले ही उनकी कम्पनी के सारे मुकदमे इंग्लैण्ड की अदालतों में चलते हों, खुद सुश्री वर्डाग  पिछले दो बरसों से दुबई में रहने लगी हैं. इसके पीछे भी उनकी नेटवर्किंग ही है. वे मध्यपूर्व के बेहद अमीर भावी मुवक्किलों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं.

इतनी कामयाबी की एक परिणति ईर्ष्याओं  और आलोचनाओं में होना अस्वाभाविक नहीं है. उनके आलोचकों का कहना है कि वे आत्म  प्रचार पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर देती हैं और अपने  मुकदमे लड़ते समय अत्यधिक आक्रामक हो जाती हैं. इसका जवाब देते हुए वर्डाग कहती हैं कि सामान्यत:  मैं दूसरे  पक्ष के साथ बहुत विनम्रता के साथ पेश आती हूं, लेकिन मुकदमेबाजी के वक़्त मैं खूंखार  हो उठती हूं. हो सकता है कि कुछ लोगों को एक औरत का यह रूप न भाता हो!

सुश्री  वर्डाग जानती हैं कि उन्हें डीवा कहा जाता है. लेकिन ज़रा उनकी यह बात भी  तो सुनें: “आप भले ही मेरे लिए डीवा का प्रयोग अपमानजनक अर्थों में करते हों, मैं तो इसे एक कॉम्प्लीमेण्ट  की तरह लेती हूं. डीवा का मतलब होता है वो जो बेबाक हो, जिसके इरादे पक्के हों और जो रंगीन और तड़क भड़क से भरपूर हो!” 
●●●
जयपुर से प्रकशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, 27 जून, 2017 को प्रकाशित आलेख का मूल पाठ. 
Post a Comment