Tuesday, May 23, 2017

फ्रांस में प्रथम महिला की उम्र को लेकर बवाल

फ्रांस की पिछली सरकार में मंत्री रहे इमैनुएल मैक्रॉन ने वहां  की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा दी है.  39 साल की उम्र में वो फ़्रांस की मुख्यधारा की वामपंथी और उदारवादी पार्टियों को हराकर राष्ट्रपति चुने गए हैं. लेकिन फ्रांस में आजकल उनकी इस आश्चर्यजनक जीत से अधिक चर्चा उनकी  पत्नी ब्रिजेट टोग्न्यूकस की हो रही है. वैसे थोड़ी बहुत चर्चा तो उनकी पहले भी होती रही है. इसलिए कि सन 2015 में जब मैक्रॉन को फ्रांस के वित्त मंत्री का दायित्व मिला तब ब्रिजेट ने अपना सफल  कैरियर  छोड़ कर उनकी मदद करना शुरु कर दिया था और फिर राष्ट्रपति  चुनाव के दौरान भी उन्होंने जमकर उनके चुनाव अभियान में हिस्सेदारी निबाही. बताया गया कि इस अभियान के दौरान ब्रिजेट ने अपने पति के हर कदम पर बारीकी से निगाह रखी.  लेकिन अब जबकि मैक्रॉन फ्रांस के राष्ट्रपति निर्वाचित हो चुके हैं, श्रीमती ब्रिजेट मैक्रॉन के बारे में चर्चाओं का स्वर कर्कश और कटु हो गया है. यहीं यह बात याद कर लेना उचित होगा कि ब्रिजेट की आयु चौंसठ वर्ष है यानि वे अपने पति से पच्चीस बरस बड़ी हैं. फ्रांस में आजकल चर्चाएं उम्र के इसी अंतराल को लेकर ज़्यादा हो रही हैं.  वैसे इस तरह की स्त्री-द्वेषी चर्चाएं उनके चुनाव अभियान के दौरान भी हुई थीं लेकिन अब तो पानी सर से ऊपर गुज़रने लगा है.

फ्रांस की जानी-मानी कार्टून पत्रिका शार्ली एब्डो ने हाल ही में अपने कवर पेज पर मैक्रॉन दम्पती का एक कैरीकेचर छापा है और उसके नीचे शीर्षक दिया है: अब वे चमत्कार दिखाने वाले हैं! वैसे तो इस शीर्षक को मैक्रॉन के चुनावी वादों से जोड़ कर अब उनके पूरा होने की सम्भावनाओं के अर्थ में पढ़ा जा सकता है लेकिन जब हम इसे कैरीकेचर के साथ देखते-पढ़ते हैं तो दोनों की आयु के अंतराल के साथ इसका एक अन्य अर्थ भी समझ में आता है जो शालीन नहीं है.  यही वजह है कि वहां के सोशल  मीडिया में सेक्सिस्ट और एजिस्ट कहकर इस कवर की खूब लानत-मलामत की जा रही है. लेकिन इसी सोशल मीडिया पर इन दोनों के लिए अनगिनत भद्दी और बेहूदा टिप्पणियां भी खूब की जा रही हैं. ऐसी ही एक टिप्पणी में ब्रिजेट को पेडोफाइलतक कह दिया गया है, जो अभद्रता की पराकाष्ठा है.

लेकिन बहुत सुखद बात यह है कि संकीर्ण और विकृत मानसिकता से उपजी इन टिप्पणियों का बहुत कड़ा और तीखा विरोध भी हो रहा है. ब्रिजेट की पिछली शादी से जन्मी बत्तीस वर्षीया बेटी भी खुलकर सामने आई हैं और उन्होंने कहा है कि उनकी मां के प्रति ऐसी कुत्सित टिप्पणियां ईर्ष्याजनित हैं. उसने इस बात पर अपनी नाराज़गी का इज़हार किया है कि इक्कीसवीं  सदी के फ्रांस में इस तरह की बेहूदा बातें की जा रही हैं. उन्होंने इन टिप्पणियों को  ब्रिजेट के स्त्री होने के साथ भी जोड़कर देखा है और पूछा है कि क्या किसी पुरुष राजनेता के बारे में भी ऐसी बेहूदा बातें की जाती हैं? स्पष्ट है कि उनका संकेत अधिक आयु वाले पुरुष और कम आयु वाली स्त्री के संग-साथ की तरफ है. और यहीं यह बात भी कि इन चर्चाओं के बाद फ्रांस का मीडिया वहां के और दुनिया भर के राजनेताओं की सूचियां खंगाल  कर स्त्री-पुरुष के उम्र के अंतराल की जानकारियां परोसने में जुट गया है. लेकिन, जैसा कि एक पत्रकार ने लिखा है, अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया के बीच भी उम्र का इतना ही अंतराल है लेकिन इसे लेकर कोई चर्चा नहीं होती है. खुद मैक्रॉन ने भी कहा है कि अगर मैं अपनी पत्नी से बीस बरस बड़ा होता तो किसी ने एक पल को भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया होता, लेकिन क्योंकि वे मुझसे बीस बरस  बड़ी हैं, हर कोई इस रिश्ते पर सवाल उठा रहा है.  

मैक्रॉन की पहली मुलाकात ब्रिजेट से जब हुई तब वे महज़ पंद्रह  बरस के थे. एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी और सात बच्चों में सबसे छोटी ब्रिजेट तब हाई स्कूल में ड्रामा टीचर थीं, विवाहिता थीं और उनके तीन बच्चे भी थे. इस मुलाकात के दो बरस बाद मैक्रॉन ने उनके प्रति अपने प्रेम का इज़हार कर दिया. बाद में ब्रिजेट ने एक साक्षात्कार में कहा कि वे प्रेम में ऐसी बहीं और मैक्रॉन के प्रति उनका आकर्षण इतना प्रबल था कि अंतत: 2006 में उन्होंने अपने तत्कालीन पति जो एक बैंकर थे, को तलाक दे दिया. इससे  अगले बरस उन्होंने मैक्रॉन से विवाह कर लिया. स्वाभाविक ही है कि उनकी यह प्रेम कथा राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान भी चर्चा में रही लेकिन सुखद बात यह कि फ्रांस की ज़्यादातर महिला वोटर्स ने इसे कोई मुद्दा नहीं माना. उलटे कुछ ने तो पलटवार करते हुए यह तक कह दिया कि वैसे तो हम पुरुषों को उनसे कम उम्र वाली स्त्रियों के साथ देखने के आदी हैं, लेकिन उसका उलट देखना बेहद सुखद है.

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत  मंगलवार, 23 मई, 2017 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ.                              
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