Tuesday, February 7, 2017

सबसे अच्छा लेख लिखकर बनें एक खूबसूरत घर के मालिक !

न्यूयॉर्क से कोई दो घण्टे की दूरी पर स्थित एक छोटे-से कस्बे बेथेल में साढ़े पाँच एकड़ ज़मीन पर बने हुए अपने दो बेडरूम के घर  को बेचने के लिए बयालीस वर्षीय एण्ड्र्यू बेयर्स और उनकी सत्तावन वर्षीया पत्नी केली ने इस बार एक नया और चौंकाने वाला तरीका आज़माना चाहा है. इस बार की बात यों कि पिछले चार बरसों में वे दो दफ़ा इसे बेचने का असफल प्रयास कर चुके  हैं. उन्होंने एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया है जिसमें कोई भी अमरीकी हिस्सा ले सकता है. प्रतियोगी को सिर्फ़ दो सौ शब्दों का एक लेख लिखकर इस सवाल का जवाब देना होगा कि इस घर का स्वामी बनने से उसका जीवन किस तरह बदल जाएगा! और यह तो मैं बताना भूल ही गया कि अपनी प्रविष्टि के साथ उसे एक छोटी-सी फीस भी जमा करानी होगी. मात्र एक सौ उनचास अमरीकी डॉलर की. आप यह भी जान लें कि श्री बेयर्स ने सन 2007 में, जबकि केली से उनकी मुलाकात भी नहीं हुई थी,  यह ज़मीन साढे सात लाख डॉलर में खरीदी थी. और फिर इस ज़मीन पर यह घर बनवाने में उन्होंने साढे तीन लाख डॉलर और खर्च किए थे. अब इतनी कीमती प्रॉपर्टी के लिए भला कौन मात्र एक सौ उनचास डॉलर खर्च कर अपनी कलम का जौहर आजमाना नहीं चाहेगा?

बेयर्स आश्वस्त हैं. उन्हें लगता है कि उनका यह प्रयोग कामयाब रहेगा और उनके मकान के लिए कोई सही ग्राहक मिल ही जाएगा. अगर ऐसा हुआ तो वे इस प्रयोग को बाकायदा एक व्यवसाय में तबदील करना चाहेंगे. इस प्रयोग के लिए जुटाए गए अपने अनुभव और अपनी विशेषज्ञता का प्रयोग करते हुए वे इसी तरह अन्य लोगों के मकान बेचने का धंधा ही शुरु कर देंगे. और करें भी क्यों नहीं? इस प्रयोग के लिए उन्होंने कम पापड़ थोड़े ही बेले हैं. करीब चालीस हज़ार डॉलर तो वे अपनी जेब से खर्च कर ही चुके हैं. अपनी इस  प्रतियोगिता के नियम वगैरह बनाने के लिए उन्होंने वकीलों के सेवाएं ली हैं, आने वाली प्रविष्टियों का मूल्यांकन करने के लिए निर्णायक नियुक्त किये हैं और अपने इस प्रयास का प्रचार करने के लिए बाकायदा प्रचारकों की सेवाएं ली हैं. इसके अलावा उन्होंने अपनी इस सम्पदा का एक खूबसूरत वीडियो भी बनवाया है ताकि भावी ग्राहक इसकी तरफ आकर्षित हों. लेकिन इतना सब कर चुकने के बाद भी बेयर्स की राह आसान नहीं है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस सम्पदा को वे सन 2015 में सवा आठ लाख डॉलर्स में भी नहीं बेच सके थे उसके लिए भला साढे पाँच हज़ार लोग अब क्यों लालायित हो जाएंगे?

अरे हां, यह साढ़े ‌ पाँच हज़ार लोगों वाली बात तो मैं आपको बताना भूल ही गया. दरअसल श्री बेयर्स ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि निबंध प्रतियोगिता का विजेता तभी घोषित होगा जब  उन्हें इस प्रतियोगिता के लिए साढ़े पाँच हज़ार प्रविष्टियां मिल जाएंगी. अब सारा खेल आप भी समझ गए होंगे. बेयर्स दम्पती प्रवेश शुल्क के रूप में प्रतियोगियों से कुल 819,500 डॉलर जुटा लेंगे.  विजेता तो उनमें से एक ही होगा. वैसे उन्होंने यह प्रावधान भी रखा है कि अगर इतने प्रतियोगी न जुटे तो वे सारे प्रतियोगियों को उनका प्रवेश शुल्क लौटा देंगे - प्रति प्रविष्टि उनचास डॉलर प्रशासकीय शुल्क काट कर.

इस प्रतियोगिता का  एक और मज़ेदार पहलू है. इसे अदृश्य फाइन प्रिण्ट भी कह सकते हैं. भले ही बेयर्स लोग विजेता को मात्र एक सौ उनचास डॉलर में यह सम्पदा देने का वादा कर रहे हैं, विजेता को कुल मिलाकर जो वित्तीय भार वहन करना होगा वह खासा बड़ा होगा. सबसे पहले तो उसे मकान की वर्तमान की कीमत के अनुरूप आयकर देना होगा, क्योंकि इनाम को आय ही माना जाता है. फिर इस सम्पदा पर उसे प्रॉपर्टी टैक्स भी अदा करना होगा जो करीब ग्यारह हज़ार डॉलर सालाना होता है. यानि एक सौ उनचास डॉलर का मकान वास्तव में जितने में पड़ने वाला है वह अगर सबको मालूम हो जाए तो बहुत सम्भव है कि लोग किस्मत आजमाने का अपना इरादा ही बदल लें. यही वजह है कि जहां अमरीकी प्रॉपर्टी बाज़ार में इस प्रयास की काफी चर्चा है वहीं गम्भीर प्रॉपर्टी व्यवसायी इसे वास्तविक प्रतियोगिता मान ही नहीं रहे हैं. वे तो इसे एक शोशेबाजी ही कह रहे हैं. आशंका  यह भी है कि बेयर्स दम्पती का यह प्रयास कानूनी उलझनों में भी फंस सकता है क्योंकि अमरीका में इस तरह की प्रतियोगिताओं के लिए अलग-अलग राज्यों में कानूनों में काफी भिन्नताएं हैं.

लेकिन जो हो, बेयर्स लोगों के इस प्रयास ने न सिर्फ भारी दिलचस्पी  पैदा की है, अगर यह कामयाब रहा तो इससे व्यापार का एक नया मॉडल भी चलन में आ सकता है.

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, 07 फरवरी, 2017 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ.   
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