Tuesday, March 15, 2016

मेक्सिको पुलिस का एक अनूठा प्रयोग

जब भी पुलिस शब्द कानों में पड़ता है एक ख़ास किस्म की दृढ़ता भरी, रौब-दाब वाली छवि जेह्न में उभर आती है. पुलिस का काम ही कुछ ऐसा है कि उसकी छवि इससे इतर हो ही नहीं सकती. उसे कानून  व्यवस्था  कायम करनी होती है, अपराध पर नियंत्रण पाना होता है, नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करनी होती है, वगैरह. और यह सब दृढ़ता के बिना मुमकिन नहीं हो सकता. लेकिन अगर कुछ समय पहले आप मेक्सिको गए होते तो आप मेरी बात से ज़रूर असहमत  होते. असल में वहां सन 2013 में एक रिटायर्ड जनरल रोनाल्डो यूजीनियो हिडाल्गो एडी ने एक ख़ास किस्म की ब्रिगेड का गठन किया था. और  जब  मेक्सिको के 57 वें राष्ट्रपति एनरिक पेना निएटो ने इस ब्रिगेड के सदस्यों के साथ खिंचाई हुई अपनी एक फोटो प्रकाशित करवाई तब से यह ब्रिगेड  चर्चाओं में आई.

असल में मेक्सिको के अकापुल्को इलाके के पुलिस चीफ ने वहां की नगरपालिका पुलिस के विस्तार के रूप में एक टूरिस्ट असिस्टेंस ब्रिगेड का गठन किया था जिसमें 18 से 28 वर्ष की वय वाली कुल 42 युवतियां शामिल थीं. इस ब्रिगेड का मुख्य दायित्व था वहां के पर्यटकों की संतुष्टि सुनिश्चित  करना. इसके लिए उन्हें वहां के समुद्र तटों की निगरानी करनी होती थी, पैदल चलने वालों की सुविधा के लिए ट्रैफिक को  नियंत्रित करना होता था और जब तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार न कर ले तब तक अपराधियों को हथकड़ी लगाकर रखना होता और इसी तरह के अन्य दायित्वों का निर्वहन करना होता था. ये सारे काम करने  के लिए इस ब्रिगेड की सदस्याओं को आत्म रक्षा, जीवन रक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए   मेक्सिकन फेडेरल सेना की तरफ से तीन महीने का  प्रशिक्षण दिया जाता था. इन्हें हर माह करीब साढ़े चार सौ डॉलर का वेतन दिया जाता था.

और अब ख़ास बात. इस ब्रिगेड में युवतियों को उनके शारीरिक आकर्षण के आधार पर भर्ती किया जाता था और उन्हें टाइट फिटिंग वाली यूनीफॉर्म पहननी होती  थी, जिसमें भूरे रंग के बरमूडा शॉर्ट्स, हल्के नीले रंग के पोलो शर्ट्स, गुलाबी लिपस्टिक और सनग्लासेस शामिल थे. इन्हें  4.7 इंच की हील पहननी होती थी. इस ब्रिगेड की शिफ्ट सुबह सात बजे से शुरु होती थी और सबसे पहले तीस मिनिट तक इन्हें मेक अप करना होता था, जिसके बाद म्युनिसिपल फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी इनका  मुआयना करते.  उसके  बाद ही ये अपनी ड्यूटी पर जा सकती थीं. इस ब्रिगेड को दुनिया की सबसे ज़्यादा सेक्सी पुलिस टुकड़ी कहा और  माना जाता था. यह सुनकर भी अगर आप चौंक नहीं रहे हैं तो फिर यह और जान लीजिए कि अधिकारी गण को इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी कि यह पुलिस टुकड़ी पर्यटकों के साथ फ्लर्ट करे, क्योंकि वे चाहते थे कि पर्यटक वहां की सुहानी यादें अपने साथ लेकर जाएं.

अब ज़रा इस सबकी पृष्ठभूमि भी जान लीजिए. दर असल मेक्सिको के इस हिस्से की अर्थव्यवस्था का अस्सी प्रतिशत पर्यटन पर आधारित है लेकिन जब से वहां ड्रग माफिया के आपसी टकरावों ने गैंग वार्स की शक्ल अख्तियार की, वहां का पर्यटन बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुआ. तब वहां के प्रशासन को लगा कि पर्यटकों का भरोसा और उनका दिल जीतना ज़रूरी है. उन्हें यह भी लगा कि ऐसी नवाचारी पुलिस उनमें ज़िम्मेदारी और विश्वास का भाव जगा सकेगी, और महिलाओं की यह टुकड़ी शायद भ्रष्ट तौर तरीकों से भी दूरी बरतेगी. और न केवल पर्यटकों ने बल्कि खुद इन पुलिस कर्मियों ने भी इस प्रयोग की सराहना की. एक पुलिस कर्मी ने अपना अनुभव  साझा करते हुए कहा कि आप अनुमान भी नहीं लगा सकते कि कोई बेहद खतरनाक ड्राइवर भी उस वक्त कितना शालीन बन जाता है जब कोई सेक्सी लड़की उसके खिलाफ़ कार्यवाही करती है.

लेकिन मेक्सिको के उस राज्य में पुलिस की कमान जैसे ही एक नए  चीफ ने सम्हाली, यह प्रयोग बीते ज़माने की बात बना दिया गया. इस नए चीफ एडुआर्डो बाहेना ने इस  टुकड़ी की 13 कार्मिकों की तो छुट्टी ही कर दी और शेष को हुक्म दिया कि वो पुलिस की आम वर्दी पहनना शुरु कर दें. कुछ कार्मिकों ने इस बदलाव का भी स्वागत किया है. मसलन उनमें से एक, रोसा का कहना है कि जब वे उस सेक्सी यूनीफॉर्म में होती थीं तो लोग ताज्जुब करते हुए उनके पास आते थे, क्योंकि मैं  असल पुलिस वाली लगती ही नहीं थीं. अब जब मैं पुलिस की वर्दी और पुलिस के जूते पहनती हूं तो मुझे गर्व महसूस होता है. गर्व तो मुझे पहले भी था लेकिन अब वह बढ़ गया है.

होली दूर नहीं है. इसलिए अब ज़रा यह कल्पना करने का कष्ट कीजिए कि अगर कभी हमारे देश में भी ऐसा प्रयोग किया गया तो हमें  कैसी छवियां देखने को मिलेंगी?

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, 15 मार्च, 2016 को मैक्सिको में सुन्दरता से अपराध पर काबू पाने का हुआ प्रयास शीर्षक से प्रकाशित  आलेख का मूल पाठ.  
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