Tuesday, April 8, 2014

जो आपकी फिक्र करते हैं उन्हें हमारा सलाम!

जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने फेस बुक पर एक छोटी-सी वीडियो क्लिप ज़ारी की है. यह  क्लिप कहती है कि सड़क पार करने के दो तरीके होते हैं. और फिर यह  उन दो तरीकों के नमूने पेश करती है.  मात्र एक मिनिट नौ सेकण्ड की इस क्लिप में पहले एक नौजवान जयपुर के भारी ट्रैफिक के बीच अपनी बाइक पर आड़े तिरछे कट मारता हुआ सड़क पार करता है. इस तरह के जां बाजों से हम रोज़ रू-बरू होते हैं!  लेकिन जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने इस तरह के बहादुरों की शान में यह वीडियो क्लिप जारी नहीं की है. जिनकी शान में यह क्लिप जारी की गई है उनका प्रवेश थोड़ी देर से  होता है. ये भी चार पैर वाले हैं. पहले जो वीर आए थे दो पैर उनके थे और दो उनकी बाइक के. अब इस क्लिप में जो आते हैं, चारों पैर उनके अपने हैं. नहीं समझे ना आप? जयपुर ट्रैफिक के इस नायक को हम श्वान उर्फ कुत्ते जी के नाम से जानते हैं. ये सड़क पर आते हैं, दांये-बांये देखते हैं, लाल बत्ती होने और ट्रैफिक रुकने का इंतज़ार करते हैं, फिर सावधानी  से आधी सड़क पार करते हैं, ट्रैफिक  के लिए लाइट हरी हो जाने पर ऐन चौराहे पर रुकते हैं, लाइट लाल होने का इंतज़ार  करते हैं और फिर जब लाइट लाल हो जाती है तो बची हुई आधी सड़क पार करते हैं.

इस  क्लिप में जो नौजवान है उसकी बाइक सामने से आती एक कार से टकराती है  और जिस तरह वो और उनकी बाइक उछलते हैं उससे आशंका होती है कि बाद में उनके साथ ज़रूर कुछ अघटनीय घटित हुआ होगा. हमारे यहां एक मुहावरा है ना कि कुत्ते की मौत मरना!....लेकिन इस क्लिप में जो कुत्ता है वो सुरक्षा से सड़क पार कर जाता  है और उसके साथ कुछ भी अप्रिय घटित नहीं होता है.

इस वीडियो को देखकर मुझे कई सबक मिले हैं. पहला सबक तो यह है कि अगर आप कुत्ते की मौत न मरना चाहें तो कुत्ते की तरह सड़क पार करें! दूसरा यह कि बहादुरी से सड़क इंसान ही पार कर सकता है, कुत्ता तो भीषण डरपोक प्राणी है. ऐसा जीना भी क्या जीना, लल्लू! तीसरा यह कि अगर ग़ालिब आज होते तो इस वीडियो को देखकर ज़रूर लिखते  – आदमी से बेहतर है कुत्ता बनना.... क्योंकि इसमें मिलती हैं लाइक्स ज़्यादा!

जबसे यह वीडियो देखा है, मैं गहरे विचार में डूबा हूं! आखिर जयपुर ट्रैफिक पुलिस को हमें शिक्षा देने के लिए तमाम प्राणियों में से यह श्वान ही क्यों मिला? चाहते तो हाथी को भी ले सकते थे. आपको पता ही होगा कि संस्कृत कवियों ने गज गामिनियों की शान में कितने कसीदे पढ़े हैं! अगर आपने संस्कृत राम: रामौ रामा:  से आगे न भी पढ़ी हो तो उन  विख्यात चित्रकार के बारे में तो ज़रूर पढ़ा सुना होगा जो कभी माधुरी दीक्षित पर मर मिटे थे. उन्होंने गज गामिनी नाम से एक पूरी फिल्म ही बना डाली थी! चलो, हमारी ट्रैफिक पुलिस को हाथी पसंद नहीं आया तो कोई बात नहीं! वे जंगल के राजा को ले सकते थे! अगर उन्होंने शेर को फिल्म में लेकर हमें सीख दी होती तो हम गर्व से यह तो कहते कि भाई हम शेर की तरह सड़क पार करते  हैं!  लेकिन गर्व करने का यह मौका भी उन्होंने हमसे छीन लिया. इन्होंने आदर्श बनाया भी तो उस प्राणी को जिसे प्राय: एक प्राकृतिक कृत्य के संदर्भ में दीवारों पर अमर किया जाता रहा है: देखो! अमुक यह कर रहा है! क्या अब लज्जित करने के लिए उसी तर्ज़ पर यह कहा जाएगा कि देखो आदमी सड़क पार कर रहा है?

अब आप ही बताएं कि एक श्वान को हम अपना आदर्श कैसे मान लें? क्या लोगों से जाकर यह कहें कि इंसान की तरह ज़िंदा रहने के लिए हम कुत्ते की तरह सड़क पार करते हैं? कुत्ते की तरह सड़क पार करके ज़िंदा रहने से क्या कुत्ते की मौत मर जाना बेहतर नहीं होगा? और जीकर भी क्या होगा? अगर ज़िंदा रह भी गए तो कोई यमला पगला दीवाना आकर हमारा खून ही तो पियेगा! साथ में एक दो गालियां और देगा!

लेकिन मित्रों यह सब बैठे ठाले का चिंतन था. कभी-कभार दिमाग में ख़लल आ जाता है ना! सच तो यह है कि जयपुर ट्रैफिक पुलिस की यह वीडियो हमें बेहद पसंद आई है और  हम चाहते हैं कि हर नागरिक न सिर्फ इसे देखे, बल्कि इससे सबक भी ले! इंसान की ज़िंदगी बहुत कीमती है, हमें कोई हक़ नहीं है कि हम उसे नष्ट करें! अगर जयपुर ट्रैफिक पुलिस हमारी ज़िंदगी को लेकर इतनी फिक्रमंद है तो हम उनके सोच को सलाम करते हैं!

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै  में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत दिनांक 08 अप्रेल, 2014 को प्रकाशित आलेख का मूल पाठ. 
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