Thursday, May 6, 2010

बदलाव मुश्क़िल है फिर भी मुमकिन है!


अक्सर कहा जाता है कि लोग आसानी से बदलना नहीं चाहते और बदलाव बहुत मुश्क़िल होता है आप धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, छोड़ नहीं पाते. वज़न घटाना चाहते हैं, कामयाब नहीं होते. फिज़ूलखर्ची रोकना चाहते हैं, रोक नहीं पाते. आप सब कुछ समझते हैं फिर भी वह नहीं कर पाते जो करना चाहते हैं. क्यों होता है ऐसा? इस सवाल का जवाब देते हैं मनोवैज्ञानिक लोग. उनका कहना है कि हमारे दिमाग में दो अलग-अलग व्यवस्थाएं, होती हैं. एक तर्क वाली और दूसरी भावना वाली. जब इन दोनों व्यवस्थाओं में तालमेल होता है तो बदलाव सुगम होता है, अन्यथा बहुत मुश्क़िल या कष्टसाध्य. इसी बात का अध्ययन और विश्लेषण प्रस्तुत किया है चिप हीथ और डैन हीथ ने अपनी नई किताब स्विच: हाउ टू चेंज थिंग्स व्हेन चेंज इज़ हार्ड में. चिप और डैन हीथ की पहली किताब मेड टू स्टिक 2007 में प्रकाशित हुई थी और बेहद लोकप्रिय हुई थी.

इन हीथ भ्राताओं को अपने अध्ययन की प्रेरणा जोनाथन हाइड्ट की प्रख्यात किताब द हेपीनेस हाइपोथीसिस से मिली. जोनाथन ने मनुष्य के दिमाग की कार्यप्रणाली की तुलना हाथी और महावत से की है और कहा है कि हाथी मनुष्य का भावनात्मक पक्ष है जबकि महावत उसका तार्किक पक्ष. इन दोनों ही पक्षों की अपनी-अपनी ताकतें और कमज़ोरियां होती हैं. कई बार हमारा भावनात्मक पक्ष हमारे तार्किक पक्ष पर हावी हो जाता है, हाथी भी तो महावत से ज़्यादा बड़ा और ताकतवर होता है. लेकिन अकेले तार्किक पक्ष के सबल होने से भी कुछ नहीं होता. आपने भी ऐसे बहुत सारे लोगों को देखा होगा जो तर्क तो बहुत अच्छा कर लेते हैं, लेकिन उसे कार्य रूप में परिणत नहीं कर पाते. वैसे भी, तर्क की बात करें तो हम समझते ही हैं कि हमारा भला किन बातों में है, लेकिन हम वैसा कर नहीं पाते हैं.

हीथ भ्राता एक ख़ास बात की तरफ़ ध्यान आकृष्ट करते हैं. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों का बर्ताव उनके परिवेश के अनुसार बदलता रहता है. जब आप किसी शांत जगह, जैसे किसी चर्च में होते हैं तो आप भी शांत रहते हैं, लेकिन जब आप किसी शोर-शराबे वाली जगह, जैसे किसी स्टेडियम में होते हैं तो आप भी शोर मचाने लगते हैं. इसी तरह ड्राइव करते समय जब आप किसी संकड़ी लेन में होते हैं तो अपनी गाड़ी की रफ़्तार कम कर लेते हैं, लेकिन चौड़ी लेन में आते ही गाड़ी की रफ़्तार बढ़ा लेते हैं. इन उदाहरणों के बाद हीथ लोग कहते हैं कि ये बातें हमें सामान्य और स्वाभाविक लगती हैं, लेकिन जब हम अपने कार्य स्थल पर कोई बदलाव करने लगते हैं तो हम केवल लोगों पर ध्यान देते हैं और परिवेश को भुला देते हैं. हीथ भ्राताओं के अनुसार, परिवर्तन लाने के लिए सबसे सरल तरीका यह है कि परिवेश को बदला जाए. हीथ भ्राता अपनी सलाह को तीन सरल बिंदुओं में समेटते हैं. ये ही किताब के तीन प्रमुख अध्याय भी हैं. एक, महावत को निर्देश दें. इसमें उज्ज्वल पक्षों की पहचान, महत्वपूर्ण चरणों की रूपरेखा तैयार करना और गंतव्य की पहचान शामिल हैं. लेखक द्वय की सलाह है कि अपने तार्किक मस्तिष्क को स्पष्ट निर्देश दें ताकि उसे यह समझ में आ जाए कि उससे क्या चाहा गया है; दो, हाथी को प्रेरित करें. यानि भावनाओं का इस्तेमाल करके पशु मस्तिष्क को प्रेरित करें. यह करते हुए परिवर्तन को संकुचित कर लें, और तीन, परिवर्तन के लिए रास्ता तैयार करें अर्थात परिवेश में ऐसा बदलाव लाएं कि सही बर्ताव आसान और ग़लत बर्ताव मुश्क़िल हो जाए. लोगों की आदतों का निर्माण करें और भीड़ को दिशा दें.

हीथ भ्राताओं की यह सलाह बहुत महत्वपूर्ण है कि जब भी आप कोई बदलाव करना चाहें, उसे संकुचित करके इतना छोटा कर लें कि वह आपके नियंत्रण में आ जाए. अपनी बात की पुष्टि में लेखकगण बिल पार्सल का यह कथन उद्धृत करते हैं : “हमने ऐसे स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जिन तक तुरंत पहुंचना संभव था....जब आप छोटे और नज़र आने वाले लक्ष्य निर्धारित करते हैं तो लोग उन तक पहुंच भी जाते हैं, और इससे उनके दिमाग में यह बात आती है कि वे कामयाब हो सकते हैं.” इस उद्धरण से प्रेरित हो हमारे हीथ भ्राता सलाह देते हैं कि छोटी कामयाबियों के लिए ज़रूरी है कि वे सार्थक हों, और हमारी तुरंत पहुंच के भीतर हों.

किताब का हर अध्याय एक रोचक कथा से प्रारंभ होता है और फिर हर अध्याय में और अनेक कहानियां हैं. ऊपर से देखने पर लगता है कि किताब कोई बड़ी और नई बात नहीं कह रही है, लेकिन अगर हम अपनी ज़िंदगी के इर्द-गिर्द नज़र डालें तो पाएंगे कि लोगों को परिवर्तन के लिए तैयार करने से ज़्यादा बड़ी बात और क्या हो सकती है? किताब हमें बहुत उम्दा तरह से समझाती है कि जड़ता यानि बदलाव के अभाव के मूल में हमारे मस्तिष्क का द्वैत होता है. अगर हम इस बात को समझ कर तदनुकूल आचरण करें तो काफी कुछ बदल सकता है.

Discussed book:
Switch: How to Change Things When Change Is Hard
By Chip Heath and Dan Heath
Published by: Broadway Business
320 Pages, Hardcover
US $ 26.00


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