Tuesday, October 24, 2017

किस्सा विकट संगीत प्रेमियों और उनसे त्रस्त नागरिकों का

क्या किसी संगीत-प्रेमी युगल का अपनी मोटर कार में स्टीरियो बजाना इतना बड़ा मुद्दा है कि अदालत को अपना कीमती वक़्त खर्च करते हुए उससे जिरह करनी पड़े और आखिरकार हस्तक्षेप करने को बाध्य होना पड़े? हाल में कनाडा के एक  शहर में जो कुछ घटित हुआ उससे तो यही लगता है कि यह मामला बहुत साधारण और नज़र अंदाज़ करने काबिल नहीं है. इस शहर में रहता है एक चौबीस वर्षीय युवा जिसका नाम है डस्टिन हैमिल्टन. डस्टिन न केवल संगीत प्रेमी है ध्वनि तकनीक का भी विशेषज्ञ है. उसने संगीत का बेहतरीन लुत्फ़  लेने के लिए अपनी क्रूज़र गाड़ी को आधुनिकतम ध्वनि उपकरणों से सज्जित कर रखा है. इस तकनीक में उसकी विशेषज्ञता का आलम यह है कि एक ऑटो साउण्ड प्रतियोगिता में उसे स्वर्ण  पदक तक मिल चुका है.  हैमिल्टन एक ख़ास किस्म के हड्डियों के रोग से ग्रस्त है जिसकी वजह से उसकी रीढ़ की हड्डी को गहरी क्षति पहुंची है. लेकिन यह पदक उसे इतना धिक प्रिय है कि तमाम असुविधाओं के बावज़ूद वो हमेशा इस पदक को अपने गले में लटकाए रहता है. डस्टिन वैंकूवर के सेण्ट्रल सानिच शहर में रहता है. उसकी गर्लफ्रैण्ड कैटरीना भी उसके साथ रहती है और संगीत से उसे भी बहुत गहरा लगाव है.

दरअसल डस्टिन और कैटरीना को बहुत ऊंची आवाज़ में संगीत सुनने का शौक है. कहा जाता है कि जब वे अपनी गाड़ी लेकर  निकलते हैं तो उससे निकलने वाली संगीत की ध्वनियां  इतनी ज़बर्दस्त होती हैं कि आस-पास के घरों के फर्श थरथराने लगते हैं, घरों की दीवारों पर लटकी तस्वीरें कांपने लगती हैं, टेबल पर रखे कॉफी मग नीचे गिर पड़ते हैं और घरों में रह रहे पालतू जानवर भयभीत हो उठते हैं. अगर रात का वक़्त हो तो डर के मारे गहरी नींद में डूबे बच्चों की चीखें निकल पड़ती हैं. और यह सब रोज़मर्रा की बातें होती हैं. स्वाभविक ही है कि इससे उस शहर के बाशिंदे परेशान हैं. हैमिल्टन  के घर से उनके दफ्तर के बीच रहने वाले नागरिक पिछले कुछ ही समय में उनके खिलाफ कम से कम सत्रह शिकायतें पुलिस में दर्ज़ करवा चुके हैं. इन शिकायतों पर गौर करते हुए स्थानीय पुलिस ने दो बार इस युगल को चेतावनी भी दी कि वे अपनी गाड़ी के साउड सिस्टम का वॉल्यूम धीमा रखा करें, लेकिन जब इन चेतावनियों का उन पर कोई असर नहीं हुआ तो पुलिस को उन्हें पाबंद करना पड़ा कि वे अपनी गाड़ी में स्टीरियो बजाएं ही नहीं. हैमिल्टन इस आदेश से सहमत नहीं था इसलिए वो अदालत में पेश हुआ और जब उससे पूछा गया कि उसे अदालती आदेश मानने में क्या दिक्कत है तो उसका कहना था कि संगीत से उसे बेपनाह मुहब्बत है, वो जो कुछ भी करता है संगीत के लिए ही करता है. असल में संगीत ही उसका जीवन है. उसने अदालत को यह भी बताया कि सैंकड़ों घण्टों की मेहनत से उसने अपनी गाड़ी में यह साउण्ड सिस्टम  फिट किया है और इस सिस्टम को खरीदने के लिए उसे अपनी गर्लफ्रैण्ड की सारी जमा पूंजी भी खपा देनी पड़ी है. ऐसे में संगीत न सुनने का आदेश भला वो कैसे मान सकता है? अदालत ने उससे यह भी अनुरोध किया कि वो दफ़्तर जाने का अपना रास्ता बदल ले ताकि उस इलाके के बाशिंदों  की शिकायत दूर हो सके. यहीं यह भी याद दिलाता चलूं कि इसी सोच के तहत उसकी गर्लफ्रैण्ड अपनी एक नौकरी छोड़ कर दूसरी नौकरी करने लगी है ताकि वह हैमिल्टन के साथ ही काम पर  जा सके.

पुलिस ने हैमिल्टन और कैटरीना के इस विकट संगीत प्रेम पर रोक लगाने के लिए अदालत के सामने एक और तर्क रखा है  जो खासा वज़नदार है.  पुलिस का कहना है कि इन लोगों की गाड़ी से निकलने वाले संगीत की तेज़ आवाज़ से वहां के बाशिंदे इतने ज़्यादा त्रस्त हैं कि वे लोग अब इनकी गाड़ी का पीछा तक करने लगे हैं. पुलिस को डर है कि कहीं ऐसा न हो कि हैमिल्टन और कैटरीना उन लोगों के हत्थे चढ़ जाए और वे लोग इन्हें कोई गम्भीर शारीरिक क्षति पहुंचा दें. यानि पुलिस ने इन लोगों की सुरक्षा का तर्क देते हुए भी इनके संगीत प्रेम पर नियंत्रण लगाने का अनुरोध किया है.

अब देखना है कि अगली पेशी पर अदालत किसके हक़ में फैसला सुनाती है! फिलहाल हैमिल्टन और कैटरीना अपने संगीत प्रेम पर अटल और अविचलित हैं. कैटरीना कहना है कि वो दस बरस से इस इलाके में रह रही है और उसे तेज़ आवाज़ में ही संगीत सुनने का आदत है, जबकि हैमिल्टन इस सारे विवाद को  बेहूदा करार देते हैं और अपनी कार को उस इलाके की सबसे उम्दा सांगीतिक कार बताते हुए कहते हैं कि इससे निकलने वाला संगीत उन्हें किसी सिम्फ़नी जैसा लगता है!

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, 24 अक्टोबर, 2017 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ. 
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