Tuesday, May 31, 2016

तुम्हारा शॉर्ट बहुत ज़्यादा शॉर्ट है मैगी!

भारत में यह आम धारणा है कि पश्चिम और विशेष रूप से अमरीका पहनने-ओढ़ने  और आचार-विचार जैसी निजी बातों के मामले  में तमाम वर्जनाओं से मुक्त है. मान लिया गया है कि यह समाज बहुत उदार है और जैसा आपको मनचीता  करने की भरपूर और निर्बाध आज़ादी देता है. यानि कोई इस बात की परवाह नहीं करता कि आपने कैसे कपड़े पहन रखे रखे हैं,  और आप क्या खा-पी रहे हैं! आम धारणा अपनी जगह और यथार्थ अपनी जगह. यथार्थ यह कि खान-पान की पूरी आज़ादी के बावज़ूद ऐसा नहीं है कि आप कहीं भी धूम्रपान या मदिरापान  कर लें. मर्यादाओं के भीतर रहकर ही आप यह सब कर सकते हैं. 

और जहां तक कपड़ों की बात है, भले ही पश्चिम को हमने अल्प वस्त्रों और देह-प्रदर्शन का पर्याय मान लिया है, हाल की एक घटना इस मिथ को भी ध्वस्त करती है.  इस घटना का ताल्लुक है सिएटल की एक मज़ाकिया परफॉर्मर मैगी मैक मफिन से. मैगी हवाई यात्रा कर न्यूयॉर्क से बोस्टन पहुंची थी और फिर बोस्टन से सिएटल जाने के लिए फ्लाइट का इंतज़ार कर रही थी. कतार में खड़े हुए उसे कोई पौन घटा बीत चुका था कि एयरलाइंस  की एक कर्मचारी उसके पास आई और विनम्रता से उससे बोली कि फ्लाइट क्रू ने खूब सोच विचार कर उसको यह बताने को कहा है कि जो वस्त्र उसने पहन रखे हैं वे उपयुक्त नहीं हैं और पायलट  ने यह कहलवाया है कि वह इन वस्त्रों के ऊपर कुछ और पहन ले, अन्यथा उसे  यात्रा करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.  उसने एक लम्बी बांह वाला स्वेटर, घुटनों से ऊपर यानि जंघाओं तक के मोजे और एक बहुत छोटा शॉर्ट पहन रखा था. असल में हवाई कम्पनी को, बल्कि क्रू को उसके इसी बेहद छोटे शॉर्ट पर आपत्ति थी.

बहुत छोटे शॉर्ट पर आपत्ति की यह  बात एकबारगी तो  अविश्वसनीय लगती है, लेकिन ऐसा हुआ. मैगी ने कहा कि उसके पास और कोई वस्त्र नहीं हैं अन्यथा वो उस शॉर्ट को बदल कर कुछ और पहन लेती. उसने एयरलाइंस को यह विकल्प भी सुझाया कि वो अपने स्वेटर को खोल कर कमर पर लपेट लेगी. लेकिन पायलट  इस पर सहमत नहीं हुआ. मैगी ने यह भी सुझाया कि उसे एक कम्बल दे दिया जाए जिससे वो खुद को ढक लेगी, लेकिन उसका यह प्रस्ताव भी नामज़ूर कर दिया गया. क्योंकि आपत्ति पायलट  की तरफ से थी, एयरलाइंस ने उसके सामने यह प्रस्ताव भी रखा कि अगर वो चाहे तो उसकी बुकिंग किसी अन्य फ्लाइट में कर दी जाए.  लेकिन यह प्रस्ताव उसे स्वीकार्य नहीं था. आखिर हुआ यह कि मैगी ने हवाई अड्डे की किसी दुकान पर जाकर बाईस डॉलर में एक स्लीप ट्रंक खरीद कर उसे पहना. तब कहीं वह अपनी इच्छित फ्लाइट में बोर्ड कर सकी.

लेकिन यात्रा पूरी करने के बाद उसने कुछ वैध सवाल उठाए. उसने जानना चाहा कि उसकी जो ड्रेस न्यूयॉर्क से बोस्टन की फ्लाइट में आपत्तिजनक नहीं मानी गई वही बोस्टन से सिएटल तक की फ्लाइट में आपत्तिजनक कैसे हो गई? आखिर न्यूयॉर्क में भी तो ट्रांस्पोर्टेशन सिक्यूरिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने उसकी  जांच कर बोर्ड करने की अनुमति दी थी. मैगी कहती है कि मुझे कहा गया कि पायलट का फैसला  अन्तिम  होता है और उस पर कोई सवाल नहीं उठाया सकता. जब एक स्थानीय समाचार चैनल ने मैगी की इस आपत्ति के हवाले से सम्बद्ध एयरलाइंस का पक्ष जानना चाहा, तो एयरलाइंस  के प्रवक्ता ने उनके हाथ में यह वक्तव्य थमा दिया: “गेट और ऑन बोर्ड  क्रू ने ग्राहक की वेशभूषा के बारे में विचार किया और वे इस फैसले पर पहुंचे कि उनके शॉर्ट्स  फ्लाइट पर मौज़ूद अन्य परिवार जन को आहत कर सकते हैं. ग्राहक को फ्लाइट के लिए मना नहीं किया गया, बल्कि उनसे नम्रतापूर्वक यह अनुरोध किया गया कि वे कपड़े  बदल लें. ग्राहक इस पर सहमत हो गईं और उनकी  यात्रा निर्बाध सम्पन्न हुई.” इसी बयान में एयरलाइंस ने यह भी कहा कि वह  “यह कठोर निर्णय करने के अपने क्रू के विवेक का समर्थन करती है. लेकिन इसी के  साथ वह  ग्राहक को नए शॉर्ट्स की लागत का पुनर्भरण करने और अपनी सद्भावना के रूप में अगली फ्लाइट में दो सौ डॉलर की  छूट देने की भी घोषणा करती है.”  लेकिन मैगी इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनकी मांग है कि पायलट  उनसे माफी मांगे और साथ ही एयरलाइंस भी अपने यात्रियों के लिए एक सुस्पष्ट ड्रेस कोड की घोषणा करे. उन्होंने बहुत गौर तलब बात यह कही है कि मुझे लगता है कि यह बात हमारे पितृ सत्तात्मक समाज की एक ख़ास प्रवृत्ति की द्योतक है कि औरतों को छोटे कपड़े बेचे तो जाते हैं लेकिन जब वे उन्हें पहनती हैं तो उन्हें इसके लिए दण्डित किया जाता है.

बात है तो विचारणीय!   
                  
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जयपुर से प्रकशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ 

उधर के अंतर्गत मंगलवार, 31 मई, 2016 को इसी शीर्षक से प्रकाशित आलेख का मूल पाठ.     
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