Tuesday, October 20, 2015

तुमने एयरब्रश के कमाल से मेरी पत्नी को गायब कर दिया

हाल में अमरीका में एक ऐसी घटना घटी जो ऊपर से देखने में सामान्य लगती है लेकिन जिसके निहितार्थ गम्भीर हैं. वैसे इस घटना का सुदूर अमरीका में घटित होना मात्र एक संयोगात्मक तथ्य है, अन्यथा ऐसा कहीं भी हो सकता है. अपने देश में भी.

हुआ यह  कि वहां की एक महिला को लगा कि विवाह के दो दशक बीत जाने और इस बीच उसकी देह में आए उम्र जनित और अन्य बहुत सारे स्वाभाविक बदलावों के कारण वो अपने पति की निगाहों में पहले जितनी दिलकश नहीं रह गई है. उसने सोचा कि क्यों न पतिदेव को विवाह की वर्षगांठ पर एक अनोखा उपहार दिया जाए! जब पति के पास उस  उपहार का बक्सा पहुंचा तो उसने बड़ी उत्सुकता से साथ उस बक्से को खोला, और पत्नी के भेजे प्रेमिल उपहार को अपने हाथों में लिया. जैसे ही उसने एक नज़र उस उपहार पर डाली, उसका दिल बैठ गया.

उपहार के रूप में उसके हाथों में थी खूबसूरत तस्वीरों  की एक एलबम. ज़ाहिर है कि ये  तस्वीरें  उसकी पत्नी की थी थी. लेकिन वो कोई साधारण तस्वीरें  नहीं थीं. वो उसकी पत्नी की फोटोशॉप की हुई, बेहतर बनाई हुई तस्वीरें थीं. उम्र के उन दो दशकों ने उसकी पत्नी के चेहरे-मोहरे  को जो कुछ भी दिया था, उसे एयरब्रश की सहायता से हटा दिया गया था, और इसी बात ने पति देव को उदास कर दिया था.

उन्होंने उस फोटोग्राफर विक्टोरिया हाल्टन को एक ख़त लिखा.  विक्टोरिया ने हाल ही में उस ख़त को अपने फेसबुक पेज पर साझा किया है. यह पत्र पढ़ने और ग़ौर करने काबिल है. पति ने लिखा है: “नमस्ते विक्टोरिया. मैं  (नाम) का पति हूं. मैं आपको यह ख़त इसलिए लिख रहा हूं कि हाल ही में मुझे एक एलबम मिला है जिसमें मेरी पत्नी की वे तस्वीरें हैं जो आपने ली हैं. मैं यह क़तई  नहीं चाहता हूं कि आपको ऐसा लगे कि  मैं उन तस्वीरों से अपसेट हूं.... लेकिन हां, मेरे पास सोचने के लिए कुछ मुद्दे हैं जिन्हें मैं आप तक पहुंचाना चाहता हूं. मैं अपनी पत्नी के साथ तब से हूं जब वे अठारह बरस की थीं और हमारे दो खूबसूरत बच्चे हैं. इन बरसों में हमारी ज़िन्दगी में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, और मेरा खयाल है कि खुद मेरी पत्नी ने ही आपसे इस तरह की परिष्कृत तस्वीरें तैयार करने को कहा है. असल में वे कभी-कभी यह शिकायत करती भी हैं कि अब मेरी निगाहों में वे उतनी आकर्षक नहीं रही हैं और अगर मेरी ज़िन्दगी में कोई और आई जो उनसे युवा हों तो क्या पता मैं उसकी तरफ खिंच जाऊं. तो मैंने जब इस एलबम को खोला तो मेरा दिल बैठ गया. ये  तस्वीरें बहुत खूबसूरत हैं और आपने अपना काम बखूबी किया है. आप बहुत टेलेण्टेड फोटोग्राफर हैं...लेकिन इन तस्वीरों में मेरी पत्नी नहीं है. आपने तो उसके हर नुक्स को गायब कर दिया है. शायद उसी ने आपको ऐसा करने को कहा था.  लेकिन आपके ऐसा करने से वो हर चीज़ गायब हो गई है जिसने  हमारी ज़िन्दगी का निर्माण किया था. जब आपने उसके स्ट्रेच मार्क्स हटाए तो आपने हमारे बच्चों के जन्म का इतिहास भी मिटा डाला, जब आपने उसकी झुर्रियां हटाईं  तो आपने हमारे संग-साथ के इन बरसों की तमाम मुस्कानें और हमारी चिन्ताएं भी मिटा दीं. जब आपने उसकी चर्बी हटाई तो आपने उसकी पाक कला निपुणता और उन सारी स्वादिष्ट चीज़ों की यादें भी मिटा डालीं जो इन बरसों में हमने साथ-साथ खाई थीं. मैं जानता हूं कि आपने अपना काम किया है. लेकिन मैं आपको सिर्फ यह बताने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं कि इन तस्वीरों को देखकर मुझे यह बात महसूस हुई है कि शायद मैं अपनी पत्नी को ठीक से यह बात नहीं कह सका हूं कि मैं उससे कितना ज़्यादा  प्यार करता हूं और जैसी भी वो है उसी रूप में उसे कितना अधिक चाहता हूं. इस तरह की बातें उसे कभी-कभार ही सुनने को मिलती हैं इसलिए उसने शायद यही सोचा होगा कि मैं उसे इन फोटोशॉप की हुई तस्वीरों जैसी देखना चाहता हूं. मुझे और बेहतर करना होगा और अपनी ज़िन्दगी के शेष बचे दिनों में मैं उसकी अपूर्णता के साथ ही उल्लसित रहूंगा. मुझे यह याद  दिलाने के लिए आपका आभार.”

आज हो यह रहा है कि विज्ञापनों आदि के द्वारा हमारे  सामने बहुत सारी आकर्षक और काम्य छवियां लहरा कर हमें लुभाया जा रहा है और उस सबके बीच हम अपने असल को विस्मृत करते जा रहे हैं. यह प्रसंग हमें एक बार फिर उसी असल की तरफ लौटा ले जाता है. मुझे अनायास ही याद आ रहा है 1984 की फिल्म ‘सारांश’ के आख़िर में अनुपम खेर अपनी वृद्धा पत्नी से कहते हैं, “तुम्हारे चेहरे की झुर्रियों में मेरे जीवन का सारांश है.”

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जयपुर से प्रकाशित लोकप्रिय अपराह्न दैनिक न्यूज़ टुडै में मेरे साप्ताहिक कॉलम कुछ इधर कुछ उधर के अंतर्गत मंगलवार, 20 अक्टोबर, 2015 को इसी शीर्षक से प्रकाशित  आलेख का मूल पाठ. 
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