Tuesday, October 30, 2007

दर्शक दीर्घा में बैठकर न देखें प्रजातंत्र का खेला

अब तक महिला विषयक लेखन के लिए सुपरिचित बेस्ट सेलर लेखिका नाओमी वुल्फ अपनी नई किताब ‘द एण्ड ऑफ अमरीका: लेटर ऑफ वार्निंग टू अ यंग पैट्रिअट’ के माध्यम से अपने देशवासियों को आगाह करती हैं कि उनके देश में प्रजातंत्र का बने रहना इस बात पर निर्भर है कि वे उसमें कितनी भागीदारी निबाहते हैं. यूरोपीय व अन्य देशों के सत्तावादी उभारों के इतिहास का स्मरण करते हुए वह भयावह आशंका जताती है कि अमरीका में भी ऐसा हो सकता है. वुल्फ बताती हैं कि किस तरह दुनिया के तमाम निरंकुश अत्याचारी शासक एक खास क्रम में उठाये गए दस कदमों से प्रजातंत्र को कुचलते रहे हैं. ये दस कदम हैं : सबसे पहले आंतरिक और बाह्य संकट का हौव्वा खडा किया जाए, गुप्त कारागार स्थापित किए जाएं, एक पैरा मिलिट्री फोर्स बनाई जाए, आम नागरिकों की निगरानी शुरू की जाए, नागरिक समूहों में घुसपैठ की जाए, मनमाने तरीके से नागरिकों की पकड-धकड की जाए और बिना किसी तर्क के उन्हें छोड भी दिया जाए, मुख्य व्यक्तियों को निशाना बनाया जाए, प्रेस को नियंत्रित किया जाए, आलोचना को ‘जासूसी’ का और असहमति को ‘देशद्रोह’ का नाम दिया जाए, और न्याय पूर्ण व्यवस्था को नष्ट किया जाए. सारी दुनिया में इन कदमों का प्रयोग खुले समाजों को बर्बाद करने में किया जाता रहा है.
नाओमी वुल्फ की यह किताब भयावह है क्योंकि यह अमरीका के आज के घटनाक्रम और बीसवीं शताब्दी के मध्य के उस घटनाक्रम में साम्य दर्शाती है जिसकी परिणति फासीवाद और द्वितीय विश्व युद्ध में हुई थी. वुल्फ ज़ोर देकर कहती हैं कि समाज तानाशाही की तरफ यकायक नहीं मुड जाया करते. प्राय: होता यह है कि ज़्यादातर लोगों की सामान्य नियमित दिनचर्या अप्रभावित रहती है. हो सकता है कि हम ‘अमरीकन आइडल’ देखते रहें, मॉल में जाकर पिज़्ज़ा ऑर्डर करते रहें और उसी वक़्त हमारी आज़ादी हमसे छीनी जाती रहे. इसीलिए वे कहती हैं कि अमरीका आज जिस रास्ते पर चल रहा है वह डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए क्योंकि आज़ादी का लोप तो सबको ही प्रभावित करेगा.
वुल्फ पूरी ऊर्जा और शिद्दत से यह एहसास कराती है कि बुश प्रशासन की नीतियों की वजह से उनका देश एक खतरनाक फासिस्ट शिफ्ट से गुज़र रहा है. वे कहती हैं कि फासीवाद तानाशाही के बगैर भी पनप सकता है.
हालांकि आम अमरीकी यह मानने को तैयार नहीं होता कि 9/11 के बाद उसका देश किसी भी तरह नाज़ी जर्मनी और चिली के फासीवाद और सर्वसत्तावादी कालखण्ड के समकक्ष बनता जा रहा है, लेकिन एक बहुत छोटे किंतु प्रतिबद्ध प्रकाशक के यहां से प्रकाशित वुल्फ की महज़ 192 पृष्ठों की किताब यह स्थापित करने में पूरी तरह कामयाब है कि उन समाजों और आज के अमरीकी समाज के बीच की समानांतरता और समानताओं या कि अनुगूंजों को अनसुना नहीं किया जा सकता. इस तरह यह किताब एक साथ ही चौंकाती है, डराती है और हमारी संवेदनाओं को झकझोरती है.
नोआमी वुल्फ इस किताब में 30 के दशक के जर्मनी, 40 के दशक के रूस, 50 के दशक के पूर्वी जर्मनी, 60 के दशक के चेकोस्लोवाकिया, 70 के दशक के चिली और 80 के दशक के चीन के परिदृश्य से 2000 के बाद के अमरीका की समानताएं दिखाकर प्रजातंत्र के सम्भावित पटाक्षेप के खिलाफ जनमत जगाने का मूल्यवान प्रयास करती हैं. वे साफ शब्दों में कहती हैं कि प्रजातंत्र ऐसा तमाशा नहीं है जिसे दर्शक दीर्घा में बैठकर देख जाए. अमरीका के संस्थापकों ने ऐसे देश की कल्पना नहीं की थी जहां वकील, स्कॉलर, राजनीतिज्ञ जैसे प्रोफेशनल ही संविधान की व्याख्या और जनाधिकारों की चिंता करें. उन लोगों ने यह कभी नहीं चाहा था कि आम लोगों से अलग ताकतवर लोग आज़ादी की रक्षा करें. उन्होंने तो यह चाहा था कि आम लोग ही अपनी आज़ादी की रक्षा करें. अमरीका के संस्थापकों ने आज़ादी को नैसर्गिक, ईश्वर प्रदत्त और ऐसी व्यवस्था कभी नहीं कहा-समझा जिसमें सभ्यता स्वत: बनी रहेगी. बल्कि उन्होंने तो अत्याचार और दमन को यथास्थिति तथा स्वाधीनता को अपवाद माना. ऐसा अपवाद जिसको पाने के लिए संघर्ष किया जाए और जो अगर मिल जाए तो उसे सीने से लगाकर रखा जाए. नोआमी वुल्फ को शिकायत है कि अमरीकियों ने प्रजातंत्र को बहुत अगम्भीरता से लिया है, जबकि इसका तो अस्तित्व ही नागरिकों की सहभागिता और सक्रियता पर निर्भर है.
किताब अमरीका को सम्बोधित है, लेकिन हम भारतीयों के लिए भी इसकी प्रासंगिकता कम नहीं है. आज अमरीका इतनी बडी वैश्विक शक्ति बन चुका है कि वहां की हर छोटी-बडी हलचल शेष विश्व को भी प्रभावित करती है. अगर वहां प्रजातंत्र का क्षरण होता है तो उसका असर हम सब पर भी पडेगा. इस बात के अतिरिक्त भी, जो बातें नोआमी अमरीका को सम्बोधित कर कह रही हैं, उन्हें हमें भी सुनना और गुनना चाहिए. कभी पण्डित नेहरु ने भी तो कहा था : एटर्नल विजिलेंस इज़ द प्राइस ऑफ लिबर्टी.
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चर्चित पुस्तक :

The End of America: Letter of Warning To A Young Patriot
By Naomi Wolf
Publisher: Chelsea Green Publishing; White River Jct., VT 05001,USA
Pages: 192
US $ 13.95

[राजस्थान पत्रिका के नगर परिशिष्ट 'जस्ट जयपुर' में दिनांक 30 अक्टूबर 2007 को मेरे साप्ताहिक कॉलम 'वर्ल्ड ऑफ बुक्स' के अंतर्गत प्रकाशित.]
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